राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 15 दिन में सामने आएगी सच्चाई, मुख्यमंत्री योगी ने दिया बड़ा बयान

Ram Mandir offering controversy

Ram Mandir offering controversy

अयोध्या। Ram Mandir offering controversy, राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। संतों ने जहां सख्त कार्रवाई की मांग की है, वहीं विपक्ष सरकार पर हमलावर हुआ है। एसआईटी की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। विपक्ष सरकार पर तंज कस रहा है तो वहीं योगी आदित्यनाथ के तल्ख तेवर दिखाए हैं।

सीएम ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए शुक्रवार को रामनगरी में कहा कि 15 दिनों के भीतर एसआईटी की जांच रिपोर्ट दूध का दूध और पानी कर देगी। जो भी दोषी होगा वो बचेगा नहीं। सात गणनाकर्मियों से एसआईटी की टीम शनिवार को पूछताछ की है। एसआईटी आज लखनऊ लौट सकती है। पिछले दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि अब तक क्या हुआ है।

एसआईटी ने की ट्रस्ट के इंजीनयिर से पूछताछ

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआईटी जांच के बीच शुक्रवार पांचवे दिन श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इंजीनियर रहे प्रयागराज के दीनानाथ वर्मा ने मीडिया में सामने आकर ट्रस्टी डॉक्टर अनिल कुमार मिश्र पर चालीस प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी महासचिव चंपतराय अनजान बने रहे और जमकर लूटखसोट होती रही।

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जन्मभूमि पर निर्मित दिव्य-भव्य राम मंदिर।

पांचवें दिन कर्मियों से कई बिंदुओं पर पूछताछ

एसआईटी में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी लखनऊ रेंज किरण एस. व विशेष सचिव वित्त विभाग नीलरतन कुमार ने पांचवें दिन शुक्रवार को भी सुबह दस बजे परिसर में पहुंच कर राम मंदिर के पीछे बने ग्रीन हाउस में बारी-बारी से बुला कर कर्मियों से विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की। सूत्रों ने बताया कि ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र सुबह 11 बजे ही पहुंच गए थे। उनसे इससे पहले भी पूछताछ की गई थी। उनसे रामशंकर यादव टिन्नू के बयानों की तस्दीक करने के साथ नकदी की गणना से जुड़े अन्य बिंदुओं पर लगभग तीन घंटे तक जानकारी ली गई। पुराने रिकार्डों के बारे में पूछा गया। पूछताछ के लिए टिन्नू यादव, मनीष यादव, केडी तिवारी व सुभाष श्रीवास्तव सहित अन्य संदिग्ध कर्मियों को भी बुलाया गया था।

सीएम योगी ने दिखाए कड़े तेवर

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री रामनगरी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के विषय पर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस को आईना दिखाया। सीएम ने कहा कि प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को नकारने वाले, रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले उपदेश दे रहे हैं। अयोध्या को अपमानित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या के बारे में समाचार पत्रों से जो जानकारी मिली, उसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। एसआईटी की रिपोर्ट आने तक ऐसी कोई बयानबाजी न हो, जो रामभक्तों की भावनाओं को आहत करती हो। यदि किसी के पास साक्ष्य हों तो एसआईटी को उपलब्ध करा दें। 

19 जून को चंपतराय से पूछताछ 

एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय को फिर बुलाया और उनसे भी पूछताछ की। डॉ. अनिल मिश्र व चंपतराय के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। रिटायर्ड बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव व मंदिर में आभूषणों की देखरेख करने वाले ट्रस्ट कर्मी कृष्णदेव तिवारी, बैंक व कलेक्शन एजेंसी के कर्मियों के साथ ही ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों से दोबारा भी पूछताछ की गई।

टाइमलाइन

  • 13 जून: राज्य सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी।
  • 11 जून: विवाद गहराया तो ट्रस्ट अध्यक्ष महांत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी महांत कमलनयनदास ने बयान दे दिया कि ‘जांच करने वाले ही बेईमान हैं तो क्या जांच होगी, भगवान ही दंड देंगे।’ इसको लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी मीडियाकर्मियों को रहस्यमयी बयान दे दिया।
  • 11 जून : ट्रस्टियों की बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया गया।
  • 10 जून : राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का वीडियो और इंटरव्यू प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने 2021-2022 में कार्यरत रहते हुए पूर्व में भी लाखों रुपये के नोटों की गड्डियों की चोरी पकड़ने का दावा किया। साथ ही सीसीटीवी फुटेज डिलीट करा देने की बात कहते हुए कई लोगों के नाम लिए। सपा प्रमुख ने वीडियो को शेयर करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
  • 9 जून: नृपेंद्र मिश्र ने रामजन्मभूमि परिसर में गोपनीय बैठक कर ट्रस्टियों से विस्तृत जानकारी ली। दिल्ली रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बता खारिज किया।
  • 8 जून: प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान ले लिया और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र देर शाम अयोध्या पहुंच गए।
  • 8 जून : भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
  • 7 जून : श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी कर आंतरिक अंकेक्षण चलने की बात कही।
  • 7 जून : सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट किया और पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन ने मीडिया से वार्ता में चढ़ावे से पांच करोड़ से साढ़े सात करोड़ रुपये की चोरी बताई।

सोमवार को पहुंची एसआईटी

राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में गबन मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सदस्य सोमवार को अयोध्या पहुंचे। टीम ने राम मंदिर परिसर में पहुंच कर दानपात्रों की धनराशि की गणना की प्रक्रिया, उसमें शामिल रहने वाले कर्मियोंं की संख्या, ट्रस्ट व मंदिर से जुड़े अन्य पदाधिकारियों का हस्तक्षेप, गणना कक्ष में लगे कैमरों के संचालन की स्थिति, गिनती के बाद नकदी बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया आदि बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली।

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राम मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार के समक्ष रखीं दानपेटिकाएं।  सौ. श्रद्धालु

एसआईटी में शामिल हुए ये अधिकारी

शनिवार 13 जून को अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच के लिए प्रदेश सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) गठिन किया। लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित जांच दल में लखनऊ रेंज के आईजी रेंज किरण एस. तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को शामिल हैं। एसआईटी को जांच कर सात दिनों में प्रारंभिक और 15 दिनों में विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी है।

हाई कोर्ट में 22 को होगी सुनवाई

इस प्रकरण में दाखिल जनहित याचिका पर हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में गत गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी। यह याचिका न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया व न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। यह मामला पुनः 22 जून को सूचीबद्ध किया गया है। मोहित अशोक की ओर से दाखिल उक्त याचिका में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से पूरे मामले का आडिट कराए जाने की भी मांग की गई है।

रामजन्मभूमि परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

लगभग 70 एकड़ के रामजन्मभूमि परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। राम मंदिर के आंतरिक परिसर की सुरक्षा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के हवाले है, तो वाह्य परिसर में पुलिस, पीएसी व विशेष सुरक्षा बल (एसएसएफ) के जवानों के साथ एसआईएस के निजी सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सभी प्रवेश द्वारों व चेकिंग प्वाइंटों पर संयुक्त रूप से पुलिस व एसआइएस के सुरक्षाकर्मी मुस्तैद रहते हैं। 

सभी एजेंसियों के करीब पांच हजार जवानों की तैनाती

परिसर की निगरानी स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू), इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), मिलिट्री इंटेलीजेंस (एमआई), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) सहित अन्य एजेंसियां करती हैं। पूरे रामजन्मभूमि परिसर में सभी एजेंसियों के लगभग पांच हजार जवानों की तैनाती है।